##निबंध@@
राष्ट्र तथा राष्ट्रवाद का राजनीतिक महत्व एवं उत्पन्न चुनौतियाँ राष्ट्र तथा राष्ट्रवाद को समझने के लिए प्रायः हमारे पास हमारे निजी अनुभव तथा समसामयिक घटना शैली पर्याप्त है । परंतु क्या हम सच में एक राष्ट्र हैं और यदि हैं तो राष्ट्रवादी होने का क्या अर्थ है? ऐसे तमाम प्रश्न राजनीतिक भूदृश्य में एक नदी बेसिन की तर्ज पर निर्माण होती परंपरा एवं लगभग हर पल आती नवीनता इसके चुनौती के परिचायक हो सकते हैं। राष्ट्र का निर्माण एक भूदृश्य तथा इतिहासिक पृष्टभूमि एवं साझे के विश्वास से बनती धरा है । जहाँ भिन्न -भिन्न राष्ट्रवाद एवं गहराते मानव संकट साथ-साथ उत्थान की प्रक्रियाएँ चलती रहतीं हैं।वहीं राष्ट्रवाद का खाका पहले ही स्पष्ट हो गया कि वह एक निश्चित भूभाग अथवा राष्ट्र या देश की आवश्यकताओं तथा उन्नत समाज के निर्माण हेतु बनाई गई एवं समयानुसार चलायमान प्रकृति जो अपने अर्थों में उस भूखंड के लोगों कि आशा आकांक्षोओं समेटे रहता है। पंडित नेहरू अपनी प्रसिद्ध पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लिखते हैं-" हांलाकि बाहरी रूप में लोगों की विविधता और अनगिनत विभिन्नताएं थीं,लेकिन हर जगह एकात्मकता कि एक ...