कॉरपोरेट सोशल रेस्पोंबिलिटी की अनदेखी निजीकरण के फलस्वरूप विषेशाधिकारों को बढ़ावा हमारे संविधान में विशेषाधिकारों की व्यवस्था की गई है समय-समय पर इसकी वैधानिकता पर प्रश्न चिन्ह लगते रहते हैं। कॉरपोरेट सोशल रेस्पोंबिलिटी समाज के उत्थान के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण है जिसे लागू करने वाला भारत विश्व का अग्रणी देश है।निजीकरण के बढ़ते दौर में इसकी प्रासंगिकता बढ़ जाती है ,विधि की प्रासंगिकता का प्रश्न इसके सामने आकर अड़ जाता है। विशेषाधिकार ,विधि के समान संरक्षण तथा विधि के शासन के बीच विरोधाभास उत्पन्न करता है ,मौलिक अधिकार एवं राज्य के नीति निदेशक तत्व इसकी व्याख्या कर करने का हक़ सुप्रीम कोर्ट को समय -समय पर देते रहते हैं ।परंतु फिर भी जहां एक तरफ समानता की बात की जाती है भेदभाव खत्म करने की बात की जाती है उस बीच विशेषाधिकार भेदभाव और असमानता की बात करते दिखाई देता है परंतु यह सत्य नहीं है ,भाग16 कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध उनके सामाजिक शैक्षणिक आर्थिक एवं भौगोलिक पिछड़ेपन के कारण उन्हें सामान्य धारा में लाने के लिए व्यवस्था करती है जो नीति निदेशक तत्व स्पष...
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