महिला सशक्तिकरण
महिला सशक्तिकरण,पुरुषों के लिए बनती चुनौती, -महिला सशक्तिकरण के इस पूरे दौर में मूल्यगत चुनौतियाँ जो पारंपरिक जहाँ सभ्यता और संस्कृति का हवाला ,पितृसत्तात्मक समाज पर गतिरोध उत्पन्न कर रहा है। -नए- नए क़ानून और उनसे उत्पन्न होने वाली स्तिथियाँ महिला और पुरुष दोनों के मानसिक स्तर पर चेतना का पटापेक्ष नए दौर के वातावरण में सामंजस्य बिठाने का प्रयास जो विद्रोह कि प्रगति जहाँ एक ओर सकारात्मक मूल्य लिए हुए हैं और वहीं दूसरी ओर नकारात्मकता की पहाड़ी निर्मित कर रही है। महिला सशक्तिकरण, -सदियों से चलती आई "इनसाइड स्टोरी " जिसपर मानव समाज या यों कहें पितृसत्तात्मक समाज हमेसा पर्दा डालती रही । महिलाओं ने सदियों से पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया न केवल सहायता की अपितु नेतृत्व भी किया । चाहे वह महाभारत की द्रोपती ,कुंती हों या रामायण की कौसल्या ,कैकई या सीता । लक्ष्मीबाई, दुर्गावती, अहिल्याबाई, झलकारीबाई या फिर प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ,इंदिरा गांधी,सोनिया गांधी आदि कई महिलाओं ने समय समय पर अपना जोहर दिखाया राजनैतिक या फिर समाजिक रूप से । - स्वतंत्रता के बाद क्रमशः महिला ...