Criticize of unconstitutional issues

 बढ़ते निजीकरण का किसानों पर प्रभाव,

किसान और बिचौलिये के मध्य बिल कि गुथी ।

विगत दिनों बढ़ते बेरोजगारी और कोरोना के असमंजस के बीच सरकार का (कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य बिल )एक ऐतिहासिक फैसला जो बढ़ते निजीकरण का नया आयाम लेकर आयी जो किसानों के खेतों से होकर गुजरती है  । APMC ( कृषि उत्पाद बाजार समिति) जैसे दीर्घकालीन आज कि शब्दावली में कहें तो जर- जर हो चुकी व्यवस्था को दरकिनार कर नया  सिस्टम लाया गया है।  जो किसान और खरीददार के मध्य बिचौलियों को हटाकर डायरेक्ट सेलिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। परंतु ये कैसे होगा? इस पर भी हम चर्चा करते हैं। सरकार ये चाहती है कि किसान अपनी फसल अपनी मन चाही कीमत में बेचे,चूँकि इसमें कोई बुराई नहीं है परंतु कैसे वह कहीं अपना उत्पाद अपने अनुसार मूल्य लगाकर बेचेगा परंतु यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि बाहर जो प्राइवेट मिल ,प्राइवेट दुकान हैं क्या वे किसी तरह लाभ कमाना नहीं चाहेंगे चूँकि भारत में 80% किसान छोटे हैं और शिक्षा के अभाव में ठगे जाते हैं। दूसरी बात किसान अपनी फसलों को उपज के पूर्व ही किसी ,सरकार कि भाषा में कहें तो बेस्ट सेलर को बेच सकेगा। चूंकि यदि सेलर के मुताबिक फसल नहीं हुआ तो सेलर या यों कहें बिचौलिया उसे अगले वर्ष और ज्यादा वसूलेगा। जहाँ एक ओर भुखमरी, बेरोजगारी तो वहीं दूसरी ओर सरकार के उचित अनुचित के मध्य बढ़ता पेंच काफी चिंतनीय है। msp कि आसंखा और बिचौलियों के बढ़ते प्रभाव विपक्ष और सरकार के चिंता का बड़ा कारण है । क्या ये बिल दोनों के मापदंड को बराबर में तोलेगा या फिर कुछ संसोधन भी जायज हैं,जिसपर आम जन की तीख़ी नज़र है। 

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